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मौन(कविता)

एक बिंदु से बनी सृष्टि सृष्टि ने सृजन किया सूर्य का सूर्य की किरणों ने बनाये तरुवर,हरित से तरुवर, तरु ने विकसित किये सुमन सुमन से निकली सुगंध ये सगंध थी प्रेम की, अथाह प्रेम की प्रेम ने जकड़ लिया हमें हम तुम प्रेम के दो हिस्से बने प्रेम की पराकाष्ठा में पनपा मौन और मौन है हमारे बीच का सबसे खूबसूरत बिंदु © सेमवाल जी नवोदय वाले

ग्यारहवीं कक्षा

“चल न भाई जल्दी,वो आ गयी होगी....यार पहले ही दिन इंतजार कराना सही नहीं लगेगा।" ये शब्द थे अंश के ,वो मुझ से बहुत नाराज लग रहा था और होना भी लाजमी सा था क्योंकि आज उसकी पहली मुलाकात थी ‘उसके साथ'।इस मुलाकात के लिए क्या क्या नहीं किया था उसने ,जिस स्कूल में हम लोग थे वहां एक लड़की और लड़के की मुलाकात के कई मायने होते हैं।क्योंकि एक मुलाकात के लिए कुछ हमें करना पड़ता था वो शायद ही किसी ने किया होगा।     मैंने अंश की बात सुनी तो मेरे दिमाग में पिछले  नौ दस महीनों की पूरी कहानी ताजा हो गई और ये कहानी थी अंश की।    कहीं न कही आप सब को ये तो लग ही गया होगा कि ये एक प्रेम कहानी हैं और प्रेम कहानी भी एक ऐसे स्कूल की जहाँ लड़के लड़की के प्यार तो दूर की बात दोस्ती पर भी सख्त पहरे लगे रहते हैं। ये जो प्रकरण है वो शुरू बहुत पहले हो गया था जब अंश नवीं कक्षा का एक उदयमान विद्यार्थी था और इस कहानी की नायिका मतलब भावना थी जो अंश से दो क्लास जूनियर मतलब सातवीं में थी, उस वक़्त हमारे दोनों मुख्य पात्र बिल्कुल बचपने में थे तो अंश का प्रस्ताव भावना समझ नहीं पाई या उसके  आस...

Solitude

I can feel the solitude Only whisper bell I am enjoying me, myself Here is serenity I can dwell Like Apart from world Listening sound of nature Pain sorrow doesn't travel In this part of curvature This wilderness is shaping me Making me more and more wild Like out of reach of everyone As not can understand prattle of child ©Semwal_ji_Navoday_wale

पिड़ान्दी माया

गढवाली कविता पिड़ा मेरी लगदी नी कुछ त्वी ता किले नी दिखेन्दी ज़रा मैं त छू निर्भे,वक़्त कू मार्यू छू मी लुकि लुकि रुवेन्दी ज़रा मी ता बण्यु पासा इ खेल कू जेमा जीतण नी मिन कभी कौथिग जुग बैठी लगिन यख प्रेम कू सचे कि माया दिखण नी मिन कभी मेरा होण कू च नी क्वी असर कैल भी नी पड़ी दिनी आँखि जैका बिना नी लगदु पराण वैल भी छोड़ी दिनी माया की साँखी यकुल सी च मेरी यू आँखि नी च कैकु भी दगडू मी तेई मेरा त चली गिन सब संगी छोड़ी नी लगदु क्वे अपणु मी तेई कन के थामण ये हिया को गाँठु जैल मेरी जिकुड़ी बड़ी रुलाई हे!देवा त्वेन सब का बाद किले यी पीडान्दी माया सी बणाई अभिषेक सेमवाल

शौर्यांगिनी

एक कविता समर्पित युद्ध में शहीद हुए वीरों की प्रेम गाथा को                    शौर्यांगिनी अमर प्रेम शौर्य बलिदान की गाथायें अनेक है कोई भूली बिसरी कोई अमर रही जग में वो निश्छल सा प्रेम,स्वार्थ रहित भाव स्पन्दित होता ऐसे प्रेमियों की रग रग में सबसे ऊपर उस तरुणा का प्रेम उसका वरण शौर्य पहरेदार सिपाही को सबसे पावन वो अजर अमर हैं चूम लेती वो शहादत की रक्तिम स्याही को आँखों में आँसू एक ना था उसके वरन् उसके तो नयनों में एक गर्व था उसका चाँद ढला आज गुम हो गया चहु ओर दिशाओं में वीरता का पर्व था कदम थामे वो चल रही थी जनाजे में देखते ख्वाब उसके,उसकी यादें रोती भी तो कैसे वो कोमला फफककर किये थे ना रोने के यार से वादे वो पत्त्थर सीने को अपने किये हुए बीच सबके तो चल रही थी हाथ सलामी दे रहे काँपते काँपते जब प्रियतम की चिता धू धू जल रही थी काँप रहे थे हाथ काँप रही थी देह शहादत मेरे प्रेम की क्या रंग लायेगी ये जो भावनाएं  उमड़ी है सबकी वो हमेशा के लिए क्या टिक पाएगी होगा भला मेरे बच्चों का कभी या ससुर मेरे सिर्फ च...

वो ऐसी दिखती है.

वो ऐसी दिखती है मानो एक ख्वाब हो वो हिंदी का प्रणाम सी मानो उर्दू का आदाब हो वो बनी किसी और माटी की मानो सबसे लाजवाब हो आँखों में उसकी कहानियाँ बहुत मानो एक किताब हो वो दर्द है पर मीठा सा एक मानो कोई वो दोआब हो उसकी खुशबू ऐसी है जैसे फूलों में गुलाब हो उसकी बातें ऐसी मोहिनी जैसे की मुफट्ट जवाब हो वो रौशनी से भरी किरण जैसे कोई आफताब हो उसकी बाते सवालों से भरी है हम जैसे उनका जवाब हो उसकी बातें पूरी आशिकाना मानो वो किसी का इश्क़ बेहिसाब हो

लिख देता हूँ

वादे तेरे यादे तेरी लिख देता हूँ मिन्नतें मेरी फरियादे मेरी लिख देता हूँ कहानी मेरी इश्क़ तेरा लिख देता हूँ अश्क़ मेरे रश्क़ तेरा लिख देता हूँ रुसवाइ तेरी वफ़ा मेरी लिख देता हूँ दर्द मेरा जफ़ा तेरी लिख देता हूँ पाना तुझे खोना तुझे लिख देता हूँ हसना तुझमे रोना तुझे लिख देता हूँ मर्जी तेरी हसरत मेरी लिख देता हूँ आशिकी तेरी इनायत तेरी लिख देता हूँ खुशबू तेरी बेचैनी मेरी लिख देता हूँ दर्द मेरा तू हमदर्द मेरा लिख देता हूँ

मैं मुस्कुराता मिलूंगा

तुझे जाना था,चली गई तू पर ये याद रहे तुझे हमेशा तुझे जब भी मिलूंगा , मैं मुस्कुराता मिलूंगा तू गीत मेरी आशिकी़ का सिर्फ तुझे ही गाता मिलूंगा तेरी बातें याद करता तेरी हँसी पर मरता तेरी की हुई तारीफों पर मैं हमेशा शर्माता मिलूंगा मैं मुस्कुराता मिलूंगा स्नेह,प्रेम,इश्क,मोहब्ब्त,प्यार तुझसे करता मिलूंगा हर बार गमों से लब सिये हँसता हँसाता मिलूंगा मैं तुझे मुस्कुराता मिलूंगा न तू बेवफा थी, न तेरी बेवफाई थी न तेरा धोखा था,न तेरी रूसवाई थी ये नगमा सबको सुनाता मिलूंगा ये नगमा मैं गाता मिलूंगा याद रखना हमेशा मैं मुस्कुराता मिलूंगा़.... मैं मुस्कुराता मिलूंगा.... ©अभिषेक सेमवाल

तुम बहुत याद आते हो

तुम बहुत याद आते हो मेरी रातो को दिन दिनों को रात कर जाते हो तुम मुझे बहुत याद आते हो ना अब हम तुम्हारे ना अब तुम तुम्हारे पर ख्वाबो से भी तुम ना जाते हो तुम बहुत याद आते हो यादों में आकर क्यों तुम सताते हो किसी और को सताओ ना तुम हमें ही क्यों पाते हो तुम हमें बहुत याद आते हो जब भी याद आते हो आँखें मेरी नम कर जाते हो तुम हमें बहुत याद आते हो आकर याद,सर्द सी हवाएं बिखेर जाते हो ना जाने कौन सा सावन हो बिना मौसम तुम यादें बरसाते हो तुम बहुत याद आते हो कितनी भी मुस्कान रख लू होंठों पर कैसे ना कैसे तुम बहुत रुलाते हो तुम बहुत याद आते हो तुम बहुत याद आते हो। ©अभिषेक सेमवाल

इश्क तेरा-2

इश्क़ तेरा-2 मैँ सूखा सा पत्ता पतझड़ में हरी भरी डाली सा इश्क़ तेरा मै चलती हवाओ सा शोख बड़ा पहाड़ सा निश्चल इश्क़ तेरा मै पीर के सागर में डूबा हूँ उसमें हंसी की फुहार सा इश्क़ तेरा तू देवी है उस पार जहाँ की पार जहाँ का है इश्क़ तेरा मैं कफिर सा भटकता फिरू मेरे सफर की मंजिल है इश्क़ तेरा मैँ अनपढ सा एक शायर हूँ ज्ञानी के ज्ञान सा ये इश्क़ तेरा मैं बंद कमरे का दिया सा रोशन पुरे जग के उजियारे सा है इश्क़ तेरा मैं पहली बार की ही हामी सा नन्हें बच्चे की जिद सा ये इश्क़ तेरा मैँ हर इम्तिहान में आखिरी हूँ जैसे सबसे पहले है इश्क़ तेरा ©अभिषेक सेमवाल